एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, कई कॉरपोरेट गवर्नेंस फर्म ने एचईजे प्रमुख की इतनी ज्यादा सेलैरी पर सवाल उठाएं हैं. प्रमोटर्स और शेयरधारकों की सैलरी बहुत ज्यादा नहीं होनी चाहिए और मुनाफ को सभी शेयरधारकों में डिविडेंड के तौर पर बांटना चाहिए. कंपनी अधिनियम 2013 के मुताबिक किसी कंपनी का कोई एक मैनेजर शुद्ध मुनाफे के 5 फीसदी से ज्यादा वेतन नहीं ले सकता.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि साल 2017-18 में झुनझुनवाला की सालाना सैलरी सिर्फ 43.33 करोड़ रुपये थी. लेकिन झुनझुनवाला की इस सैलरी को लेकर शेयरधारकों और कॉरपोरेट गवर्नेंस फर्मों की बेचैनी बढ़ गई है. वहीं रवि झुनझुनवाला के कंपनी के नियम के मुताबिक मुनाफे के 2.5 फीसदी तक कमीशन दिया जाता है, जिसकी वजह से उनके वेतन में करीब 119 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में ही हैं.
बता दें कि पिछले वित्त वर्ष में ग्रेफाइट की कीमतों में आए उछाल की वजह से कंपनी के मुनाफे में भी रिकॉर्ड बढ़त हुई थी. मार्च में खत्म वित्त वर्ष में एचईजी (HEG) की बिक्री 140 फीसदी बढ़कर 6,593 करोड़ रुपये हो गई है. वहीं, कंपनी का मुनाफा 175 फीसदी बढ़कर 3,026 करोड़ रुपये पहुंच गई. एलएनजी भीलवाड़ा समूह की कंपनी HEG लिमिटेड ग्रैफाइट इलेक्ट्रोड का उत्पादन करती है.