नई दिल्ली. छोटे कारोबारियों के लिए राहत पैकेज हो या फिर ज्वैलर्स के लिए गोल्ड पॉलिसी। अब इनको नई सरकार के आने का इंतजार करना होगा। आचार संहिता लागू होते ही अब कई अहम फैसले लटक गए हैं। तारीखों के एलान के साथ ही कई लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। छोटे कारोबारी आस लगाए बैठे थे कि मुफ्त दुर्घटना बीमा समेत विशेष राहत पैकेज की घोषणा हो जाएगी। प्रस्ताव पर कारोबारियों और सरकार के बीच चर्चा भी हो चुकी थी। प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के लिए तैयार था। लेकिन अब चुनाव आचार संहिता लागू हो चुकी है। इसी तरह वित्त मंत्री ने बजट भाषण में गोल्ड पॉलिसी लाने का वादा किया था। गोल्ड पॉलिसी के तहत ज्वैलरी सेक्टर को संगठित उद्योग के तौर पर विकसित करने योजना है। कई बार चर्चाओं का दौर चला। कैबिनेट के लिए मसौदा भी तैयार हो गया। लेकिन अब नई सरकार के बाद ही इस पर बात बढ़ पाएगी। इतना ही नहीं लेबर रिफॉर्म के लिए इंडस्ट्रियल कोड सरकार ने तैयार कर लिया है। लेकिन अब ये अटक गया। अलग-अलग इंडस्ट्री के विकास के लिए इंडस्ट्रियल पॉलिसी का मसौदा भी तैयार था। पुरानी गाड़ियों को बेचने पर रियायत देने वाली स्क्रैपेज पॉलिसी पर भी कई दौर की चर्चा हो चुकी है। लेकिन अब ये सब नई सरकार के आने पर ही आगे बढ़ पाएगी। सिर्फ ये पॉलिसी ही नहीं बल्कि ऐसे फैसले जिसके अमल से राजनितिक तौर पर नुकसान हो सकता है वो भी फिलहाल ठंडे बस्ते में ही समझिए। जैसे सरकारी कंपनियों के बंद करने, टैक्स की वसूली के लिए बड़े पैमाने पर छापेमारी। जैसे रास्तों पर सरकार अब काफी धीमी रफ्तार से चलेगी।
