जयपुर. म्यांमार से तस्करी के जरिये लाए गए सोने में शामिल गिरोह की निगरानी में सीमा शुल्क अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत में लाए गए सोने की विदेशी छाप-चिह्न (मार्किंग) हटाने के लिए उसे पिघलाया जा रहा है और उसका स्वरूप बिगाड़ा जा रहा है। अधिकारियों केअनुसार म्यांमार ने पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर की सीमाओं पर सोना पिघलाने वाली कई इकाइयां लगाई हैं ताकि शुल्क से बचने के लिए सोने की इन छड़ों की पहचान छिपाई जा सके। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) को इस मामले में वैश्विक स्तर पर जांच करने के लिए कहा है ताकि वे देश मेंं अवैध उद्देश्यों के लिए बनाई गई इन पिघलाने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करें। इसके पीछे एक अंतरराष्ट्रीय संगठित गिरोह होने का संदेह है और सीमाओं पर जमीनी रास्ते के जरिये भारत में इसका प्रवेश हो रहा है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में खुफिया एजेंसी द्वारा अब तक 1,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का लगभग 3500 किलोग्राम सोना और सोने के गहने जब्त किए जा चुके हैं। नोटबंदी के बाद लगातार दो वर्षों के दौरान तस्करी में इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष 2017-18 में सीमा शुल्क विभाग ने 974 करोड़ रुपये मूल्य का 3225 किलोग्राम सोना जब्त किया। नोटबंदी वाले वर्ष के दौरान जब्त किए गए 472 करोड़ रुपये मूल्य के 1,422 किलोग्राम सोने की तुलना में इसमें 100 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह गिरोह मणिपुर की 400 किलोमीटर लंबी छिन्न-भिन्न अंतरराष्ट्रीय सीमा का लाभ उठा रहा है। अधिकारी को यह भी संदेह है कि मणिपुर के सीमावर्ती शहर मोरे से नागरिकों के खुले आवागमन ने इस क्षेत्र को सोने की अवैध तस्करी का शिकार बना दिया है। सोने की ये छड़ें ज्यादातर भू-मार्गों के जरिये प्रवेश कर रही हैं क्योंकि समुद्र और जहाजों के माध्यम से पकड़े जाने की आशंका अधिक रहती है इसलिए तस्करों के लिए वहां से परिवहन संभव नहीं होता। हालांकि अधिकारी ने यह भी कहा कि तस्करों ने तस्करी का सोना लाने-ले जाने के लिए नए तरीके भी अपनाए हैं। हाल ही में डीआरआई ने दुबई के एक व्यवसायी को भारत से अवैध रूप से विदेशी मुद्रा लाने पर 70 संवाहकों का इस्तेमाल करने में गिरफ्तार किया। इसके अलावा दुबई से भारत के विभिन्न शहरों में सोने की तस्करी भी की गई थी। चूंकि सोने की बहुत अधिक मांग होती है इसलिए सीमा शुल्क अधिकारियों के सामने इस पीली धातु की तस्करी के अनोखे तरीके आते रहते हैं। सोने को मलाशय में वाहनों के बैटरी बॉक्स और एयर-फिल्टर में तथा बाल संवारने वाले उपकरणों आदि में छिपाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। कुछ लोगों ने चूर्ण के रूप में ऊर्जा प्रदान करने वाले पेय में मिश्रित करके भी सोने को छिपाने की कोशिश की है। डब्ल्यूजीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कीमती धातु का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार भारत सालाना 800-900 टन सोने की खपत करता है। देश की सोने की दो-तिहाई मांग ग्रामीण क्षेत्रों से आती है।
