नई दिल्ली. कमोडिटी एवं शेयर बाजार नियामक सेबी ने एग्री कमोडिटीज का वायदा कारोबार कराने वाले एक्सचेंजों को किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की मदद के लिए एक कोष बनाने का निर्देश दिया है। इस कोष में में सेबी की तरफ से रेगुलेटरी फीस के तौर पर छोड़ा गया पैसा जमा किया जाएगा। सेबी ने इस कोष की रुपरेखा और इसके फंड के उपयोग से जुड़े दिशा-निर्देश भी भी जारी किए हैं। गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में सेबी ने इन एक्सचेंजों पर कारोबार के कई स्लैब पर अलग-अलग दर शुल्क लगाने की जगह एक लाख रुपये सालाना शुल्क लागू किया था। सेबी की बेवसाइट पर भी इस आदेश की जानकारी दी गई है। सेबी ने कहा है कि एक्सचेंजों को इस साल 10 अप्रैल तक इस फंड की पूरी रूपरेखा बनानी होगी। साथ ही इस रुपरेखा की जानकारी एक्सचेंजों को अपनी अपनी बेबसाइट पर भी डालनी जरूरी होगी। इस कोष को किसी अन्य कोष से नहीं जोड़ा जा सकता है। उदाहरण के तौर पर इस फंड को एक्सचेंज किसी अन्य फंड जैसे निवेशक सुरक्षा निधि, निवेशक सेवा निधि और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) मद में नहीं दिखा सकते हैं। कार्य योजना तय करते समय एक्सचेजों को किसानों / एफपीओ को गोदाम के खर्च की माफी, बोरी खर्च के भुगतान और ब्रोकर के शुल्क की वापसी जैसे मुद्दों पर विचार करना होगा।
