नई दिल्ली। दलाल पथ पर बजट बाद शुरू हुई बिकवाली घरेलू खुदरा निवेशकों पर थोड़ी भारी पड़ती दिख रही है। 5 जुलाई को बजट पेश किए जाने के बाद से अब तक शेयर बाजार में अमीर और खुदरा निवेशकों को करीब 1.33 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी है। इसमें म्युचुअल फंड और बीमा कंपनियों में किए गए निवेश पर हुए नुकसान को शामिल नहीं किया गया है। घरेलू संस्थागत निवेशकों को पिछले एक महीने में 3.33 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। धनाढ्य निवेशकों (एचएनआई) सहित घरेलू निवेशकों की प्रत्यक्ष शेयरधारिता घटकर 10.9 लाख करोड़ रुपये रह गई, जो 4 जुलाई, 2019 को 12.31 लाख करोड़ रुपये थी। सभी सूचीबद्घ कंपनियों का एकीकृत बाजार पूंजीकरण इस दौरान करीब 10 फीसदी घट गया और पिछले एक महीने में निवेशकों की पूंजी करीब 14.8 लाख करोड़ रुपये घटी है।
जून, 2019 के अंत तक घरेलू खुदरा निवेशकों की देश की शीर्ष सूचीबद्घ कंपनियों में औसतन 8.32 फीसदी हिस्सेदारी थी। विदेशी संस्थागत निवेशकों (23.24 फीसदी) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (13.19 फीसदी) के बाद ये तीसरे सबसे बड़े गैर-प्रवर्तक शेयरधारक थे। रुपये के लिहाज सेे देखें तो सबसे ज्यादा नुकसान प्रवर्तकों को उठाना पड़ा और इसमें भारत सरकार भी शामिल है। पिछले एक महीने में प्रवर्तकों की संपत्ति 7.34 लाख करोड़ रुपये घट गई है। इसकी तुलना में विदेशी निवेशकों की बाजार पूंजी इस दौरान 3.14 लाख करोड़ रुपये कम हुई है। घरेलू निवेशकों को म्युचुअल फंड और बीमा कंपनियों के जरिये शेयर बाजार में निवेश से भी अप्रत्यक्ष तौर पर नुकसान उठाना पड़ा है। इनकी शेयरधारिता घटकर 28.5 लाख करोड़ रुपये रह गई है, जो बजट के दिन 31.8 लाख करोड़ रुपये थी।