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आज के ही दिन तिरंगे को मिली थी राष्‍ट्रीय ध्‍वज के तौर पर मान्‍यता

साल 1931 वो वर्ष है जो राष्‍ट्रीय ध्‍वज के इतिहास में यादगार करार दिया जाता है. तिरंगे ध्‍वज को देश के राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्‍ताव पास किया गया था. इसी ध्‍वज ने वर्तमान में जो तिरंगा है, उसकी आधारशिला तैयार की थी. 21 जुलाई भारत के इतिहास में एक अहम दिन के तौर पर दर्ज है. यही वो दिन है जब तिरंगे को देश के राष्‍ट्रीय ध्‍वज के तौर पर स्‍वीकारा गया था. इसी दिन संविधान सभा ने तिरंगे को देश के राष्‍ट्रीय ध्‍वज के तौर पर स्‍वीकार कर, उसे मान्‍यता दी थी. 19वीं सदी में जब भारत पर ब्रिटिश शासन था तो उस समय कई तरह के झंडे देश के अलग-अलग राज्‍यों के शासकों की तरफ से प्रयोग किए जा रहे थे. मगर सन् 1857 में जब स्‍वतंत्रता संग्राम छिड़ा तो इस बात पर विचार किया गया कि एक समान ध्‍वज देश की जरूरत है.हालांकि कुछ लोग यह भी कहते हैं कि 22 जुलाई 1947 को तिरंगे के तौर पर संविधान सभा ने मान्‍यता दी थी. सबसे पहले जिस ध्‍वज को ब्रिटिश प्रतीकों पर आधारित करके तैयार किया गया था, उसे स्‍टार ऑफ इंडिया के तौर पर जाना गया था. स्‍टार ऑफ इंडिया कई झंडों का एक समूह था जिसका प्रस्‍ताव ब्रिटिश शासकों की तरफ से तब दिया गया था जब वो यहां पर
राज कर रहे थे. 20वीं सदी आते-आते, एडवर्ड VII के कार्यकाल के दौरान एक ऐसे प्रतीक की जरूरत महसूस हुई जो ब्रिटेन के शासन वाले भारत का प्रतिनिधित्‍व कर सके. जो लोकप्रिय प्रतीक उस समय मौजूद थे उनमें भगवान गणेश, मां काली और इस तरह के प्रतीक शामिल थे. मगर इन सभी को ये कह‍कर
खारिज कर दिया गया कि ये एक धर्म विशेष पर आधारित हैं.

बंगाल विभाजन ने दी नई दिशा
सन् 1905 में जब बंगाल का पहला विभाजन हुआ तो एक नया भारतीय झंडा सामने आया जिसे देश के लोगों को एक करने के मकसद से तैयार किया गया था. इस झंडे को वंदे मातरम झंडे के तौर पर जाना गया था. ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्‍वदेशी आंदोलन के समय इसे लॉन्‍च किया गया था. इस झंडे में आठ सफेद कमल थे और आठ प्रांतों को दर्शाने वाले प्रतीक भी थे. इस झंडे को कोलकाता में लॉन्‍च किया गया था. इसे किसी भी तरह से मीडिया में कोई जगह नहीं मिली थी और न ही किसी अखबार में इसका जिक्र हुआ था. इस झंडे का ही प्रयोग भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन के दौरान किया गया था.

जब गांधी जी को भेंट किया गया झंडा
सन् 1921 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र के दौरान विजयवाड़ा में एक युवक ने एक झंडा बनाया और गांधी जी को दिया. यह दो रंगों का बना था. लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्‍दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्‍व करता है. गांधी जी ने सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्‍व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्‍ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए.

कैसे आया तिरंगा
साल 1931 वो वर्ष है जो राष्‍ट्रीय ध्‍वज के इतिहास में यादगार करार दिया जाता है. तिरंगे ध्‍वज को देश के राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्‍ताव पास किया गया था. इसी ध्‍वज ने वर्तमान में जो तिरंगा है, उसकी आधारशिला तैयार की थी. यह झंडा केसरिया, सफेद और बीच में गांधी जी के चलते हुए चरखे के साथ था. इसके बाद 21 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इसी झंडे को भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज के तौर पर अपनाया. 15 अगस्‍त 1947 को आजादी मिलने के बाद इसमें बस एक ही बदलाव हुआ. तिरंगे में चरखे की जगह पर अशोक चक्र को दिखाया गया था.

 

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