कोलकाता। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Union Minister of Petroleum and Natural Gas Dharmendra Pradhan) ने शनिवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण कच्चा तेल की कीमतों में हुई वृद्धि से घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने यहां सीआईआई के एक कार्यक्रम से इतर कहा, ‘सरकार ने प्रतीक्षा करो और नजर रखो का रुख अपनाया है। फिलहाल घबराने की कोई जरूरत नहीं है।’ उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक कारणों से फारस की खाड़ी वाले इलाके में तनाव है। प्रधान ने कहा, ‘वैश्विक बाजार में कच्चा तेल की कोई कमी नहीं है। हां, कच्चा तेल की कीमतों में कुछ तेजी आयी है, लेकिन पिछले दो दिनों में इसका दाम घटा भी है।’
70 अरब डॉलर के निवेश की संभावनाएं
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने शनिवार को कहा कि इस्पात मंत्रालय देश के पूर्वी क्षेत्र में इस्पात उद्योग से जुड़ी परियोजनाओं में कुल मिला कर 70 अरब डॉलर के निवेश की संभावनाएं देख रहा है। उनकी राय में ये परियोजनाएं क्षेत्र में विकास की गति तेज करेंगी। प्रधान यहां ‘पूर्वोदय’ कार्यक्रम के उद्घाटन के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, उत्तरी आंध प्रदेश, झारखंड और ओडिशा के पिछड़े जिलों के विकास के लिये इन इलाकों में इस्पात उद्योग की परियोजनाओं का बड़ा योगदान हो सकता है।
इस्पात उद्योग के विकास की बड़ी संभावना
उन्होंने कहा कि पूर्वी क्षेत्र में कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे खनिज प्रचूर मात्रा में उपलब्ध हैं। इस कारण इस क्षेत्र में इस्पात उद्योग के विकास की बड़ी संभावना है। इस सूची में बिहार को भी शामिल किया जा सकता है। राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 में 2030 तक इस्पात उत्पादन क्षमता 30 करोड़ टन वार्षिक करने का लक्ष्य है। इसमें से 20 करोड़ टन पूर्वी क्षेत्र से आ सकता है। उद्योग मंडल सीआईआई द्वारा आयोजित इस समारोह में प्रधान ने कहा, ‘‘आज भी देश में सालाना 14 करोड़ टन के इस्पात उत्पादन में नौ करोड़ टन पूर्वी क्षेत्र में हो रहा है।’’