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नेशनल हाईवे का प्रोजेक्ट बना हादसों का प्रोजेक्ट

ब्यावर-पाली-पिंडवाड़ा का नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट बना हादसों का सबक
पाली. ब्यावर-पाली-पिंडवाड़ा का नेशनल हाईवे का फोर लेन रोड प्रोजेक्ट जो कि पीपीपी मॉडल के तहत तैयार हुआ था वो अब हादसों का सबक बन गया है। एल एंड टी कम्पनी का 2472 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की हालत खस्ता है। राहगीरों को यहां से निकलने में भयंकर परेशानी से गुजरना पड़ता है। जगह-जगह रोड़ टूटी हुई है, बड़े-बड़ गड्ढे बने हुए हैं, लाइट की व्यवस्था भी शून्य है। शोचालय का निर्माण तक नहीं किया गया है और नेशनल हाईवे कंपनी पर पेनल्टी लगाने की बजाय शिकायतों की कार्रवाई तक नहीं कर रहा है। करोड़ों खर्च करने के बाद भी ब्यावर से पिण्डवाडा के बीच बने इस फोरलेन पर करीब ऐसे 19 प्वाइंट हैं जिन्हे दुरुस्त किए बिना यातायात चल रहा है और यहा पर होने वाले हादसे और उनमें होने वाली मौतें लोगों को रूला रही है। नेशनल हाईवे होने के बावजूद भी रोड़ कहीं पर भी समतल नहीं है। टोल शुरू होने के बाद तो कम्पनी ने टूटी हुई सडक़ों पर ध्यान देना बिल्कुल छोड़  रखा है।
उल्लेखनीय है कि एनएचएआई के सेफ्टी कंसल्टेंट की रिपोर्ट जो नेशनल हाइवे ऑथोरिटी ऑफ  इंडिया को भेजी गई थी उसमें बताया गया है कि ब्यावर से बर के बीच तथा सिरोही शहर से सटा सिरणवा पहाडियों में पडने वाले क्षेत्र तक के 18 प्वाइंट के अलाव, सेंदडा और बर के बीच राजस्थान की सबसे उंची पुलिया में कई कमियां पाई गई है। एल एंड टी कम्पनी ने सरकार के साथ धोखा किया है। पैसा कमाने की आड़ में खिलवाड़ किया गया है परंतु फिर भी नेशनल हाईवे विभाग आंखें बंद कर बैठा है।

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