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Malls and retailers working to resolve differences

मतभेद दूर करने में जुटे मॉल और रिटेलर

जयपुर। करीब दो महीने के गतिरोध के बाद खुदरा विक्रेता और मॉल मालिक (Malls and retailers) किराये (Rent) को लेकर अपने विवाद सुलझाना (resolve differences) चाह रहे हैं। ऐसा अनलॉक का पहला चरण (Unlock 1.0) शुरू होने की वजह से किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न गतिविधियों को धीरे-धीरे खोला जाएगा। मुंबई को छोड़कर देश के ज्यादातर हिस्सों में मॉल 8 जून को फिर से (Malls Open) खुलेंगे। महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) ने मुंबई (Mumbai) में कोरोना (Corona Virus) के बढ़ते मामलों के कारण शहर में मॉल (Malls) नहीं खोलने का फैसला किया है।

तय किराये या न्यूनतम गारंटी राशि में कुछ छूट देने को तैयार मॉल मालिक

बहुत से सूत्रों ने जानकारी दी कि मॉल (Malls) को फिर से खोलने के समय को लेकर स्पष्ट सूचना जारी की गई है, इसलिए डेवलपरों और खुदरा विक्रेताओं ने बातचीत शुरू कर दी है। मॉल मालिक, विशेष रूप से बड़े मॉल मालिक उस तय किराये या न्यूनतम गारंटी राशि में कुछ छूट देने को तैयार हैं, जो खुदरा विक्रेताओं को अपने मौजूदा करार के तहत चुकानी होती है। सूत्रों ने बताया कि वे ऐसा मॉल (Malls) फिर से खुलने के बाद करीब तीन महीने के लिए करने को तैयार हैं। ताकि खुदरा विक्रेता अपने कारोबार को पटरी पर ला सकें।

दो महीनों में काफी तकलीफ झेली

फ्यूचर रिटेल के संयुक्त प्रबंध निदेशक राकेश बियाणी ने कहा, ‘हमें इस संकट को लेकर बीच का रास्ता निकालना होगा।’ उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्षों ने ही लॉकडाउन के कारण पिछले दो महीनों में काफी तकलीफ झेली हैं। इसलिए अब हमें मिलकर काम करने की जरूरत है ताकि उपभोक्ताओं के लिए स्टोर और मॉल में आना सुरक्षित एवं आसान बनाया जा सके।’

बड़े मॉल किराये के करारों में फेरबदल पर सहमत नहीं

इनॉर्बिट मॉल्स के सीईओ रजनीश महाजन ने कहा, ‘हम इस सप्ताह खुदरा विक्रेताओं से बातचीत करेंगे। हम अभी कोई फैसला नहीं ले पाए हैं।’ इनोर्बिट के मुंबई और नवी मुंबई में मॉल (Malls) हैं। हालांकि बड़े मॉल (Big Malls) किराये (Rent) के करारों किसी फेरबदल के बारे में विचार नहीं करना चाहते हैं। मगर छोटे मॉल इन विकल्पों पर विचार करने को तैयार हैं, जिनमें तीन महीने की अवधि के लिए किराये पर राजस्व हिस्सेदारी मुहैया कराना भी शामिल है।

10 से 12 फीसदी किराये की पेशकश

प्रोजोन मॉल्स के सीईओ बिपिन गुरनानी ने कहा, ‘हमने यह सोचा है कि हम इस साल थोड़ा अधिक देंगे और जब स्थितियां बेहतर हो जाएंगी तो ज्यादा लेंगे। लॉकडाउन के बाद हम कुछ समय के लिए राजस्व हिस्सेदारी के लिए भी तैयार हैं।’ कुछ खुदरा विक्रेताओं ने मार्च 2020 से अगले 9 महीनों तक किराये के रूप में 10 से 12 फीसदी राजस्व लेने को कहा है। मगर उनकी यह पेशकश ज्यादातर बड़े मॉल मालिकों ने ठुकरा दी है। उनका तर्क है कि उन्होंने बैंकों की लीज रेंटल डिस्काउंटिंग स्कीम योजना के तहत अपनी लीज पर दी हुई परिसंपत्तियों पर ऋण ले रखे हैं।

 

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