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आसमान से बिजली गिरेगी, जान भी बचेगी

नई दिल्ली.  आसमानी बिजली की चमक क्षण भर के लिए पूरे आसमां को रोशन कर देती है लेकिन अगर यह जमीन तक आ जाती है तो इसका खतरनाक असर होता है। ओडिशा में हर साल आसमानी बिजली से करीब 400 लोगों की जान चली जाती है जो किसी भी दूसरी प्राकृतिक आपदा से होने वाली मौतोंं से अधिक है। इससे निपटने के लिए ओडिशा सरकार सतर्क ऐप लेकर आ रही है जो न केवल उपयोगकर्ताओं को आसमानी बिजली के बारे में चेतावनी जारी करेगा बल्कि इसके आपेक्षित प्रभाव वाले क्षेत्रों में उपस्थित मोबाइल नेटवर्कों को भी अलर्ट भेजेगा। इस तरह का ऐप लाने वाला ओडिशा पहला राज्य नहीं है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश आसमानी बिजली की पूर्व जानकारी के लिए सिडिलू और वज्रपात ऐप लॉन्च कर चुके हैं। हालांकि समुद्र के किनारे स्थित होने का कारण ओडिशा में ऐप के सामने काफी चुनौतियां होंगी। यहां चक्रवात, तेज बारिश, तूफान जैसी प्राकृतिक घटनाएं लगातार होती रहती हैं और इन सभी घटनाओं में बिजली कड़कती रहती है। हालांकि विभिन्न स्तरों पर प्रयास के चलते दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौत कम हुई हैं लेकिन आसमानी बिजली से मृत्यु पर लगाम नहीं लग सकी। रिपोर्ट की मानें तो वर्ष 2015-16 से 2017-18 के बीच बिजली गिरने से 1256 लोगों की मौत हो गई जो प्राकृति आपदाओं से होने वाली कुल मौत का 27 प्रतिशत है। ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ओएसडीएमए) के अधिकारी ने कहा तकनीक और पूर्व चेतावनी प्रणालियां अपनाने से चक्रवात और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौत में कमी आई है लेकिन अभी तक आकाशीय बिजली की पूर्व चेतावनी के लिए कोई तंत्र मौजूद नहीं था। अब ओएसडीएमए ने राज्य में आकाशीय बिजली से बचाव और चेतावनी तंत्र स्थापित करने के लिए अमेरिका स्थित अर्थ नेटवक्र्स के साथ साझेदारी की है। राज्य में आकाशीय बिजली की पहचान करने के लिए छह सेंसर लगाए जा चुके हैं और विभिन्न स्थानों पर 14 और सेंसर लगाए जाएंगे।                         प्रायोगिक परियोजना के तौर पर इनमें से एक शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान यूनिवर्सिटी भुवनेश्वर में लगाया गया है। अर्थ नेटवक्र्स लाइटनिंग सेंसर (ईएनएलएस) अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक सेंसर का उपयोग करता है और इसे दूरसंचार टावर या इमारतों के शीर्ष पर लगाया जाता है। इनकी रेंज 200-400 किलोमीटर तक होती है और यह बिजली गिरने की घटना से 30-35 मिनट पहले इसके गिरने के स्थान की जानकारी पता लगा लेता है। शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर एनवायरनमेंट ऐंड क्लाइमेट के निदेशक शरत चंद्र साहू कहते हैं इस तंत्र में एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सेंसर लगे हैं जो बादलों के बीच और धरती तक आने वाली बिजली की पहचान कर लेते हैं। साथ ही मौसम संबंधी सेंसर तापमान, हवा, आद्र्रता, वायुमंडलीय दाब और वर्षा का पता लगाते हैं।

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