सऊदी अरब में विश्व के सबसे बड़े तेल शोधन संयंत्र और एक प्रमुख तेल क्षेत्र पर शनिवार को ड्रोन से हमला किया गया था. यमन में ईरान समर्थक हुती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली थी. इस हमले से भड़की आग के चलते सऊदी अरब की आधी से अधिक तेल आपूर्ति बाधित हो गई है. पिछले कुछ सप्ताह से सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर ड्रोन से हमले की कई घटनाएं हुई हैं. ताजा हमला सबसे अधिक क्षतिकारक साबित हुआ है. इसी बीच अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया. पोम्पिओ ने कहा, ‘‘यह हमला यमन से होने का कोई सबूत नहीं मिला है. ईरान ने अब वैश्विक कच्चा तेल आपूर्ति पर अप्रत्याशित हमला किया है.’’ ईरान और अमेरिका के बीच पहले से जारी तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव के और बढ़ जाने की आशंका भी गहराने लगी है.
देश की छवि खराब करने के लिए खुफिया संगठनों का कुचक्र
अमेरिका के आरोपों पर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मूसावी के हवाले से एक बयान में कहा गया, ‘‘ऐसे निराधार और बिना सोचे-समझे लगाए गए आरोप एवं टिप्पणियां निरर्थक और समझ से परे हैं.’’ मूसावी ने कहा कि पूर्वी प्रांत के अब्कैक और खुरैस पर हुए हमलों को लेकर लगाए जा रहे आरोप ईरान के खिलाफ कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी टिप्पणियां… किसी देश की छवि खराब करने के लिए खुफिया संगठनों का कुचक्र रचने और भविष्य के कदमों की रूपरेखा तैयार करने के लिए की गईं ज्यादा लगती हैं.’’
‘न हम, न ही अमेरिकी युद्ध चाहते हैं’
प्रकाशित टिप्पणी में इस्लामिक रेवोल्युशनरी गार्ड कोर की हवाई शाखा के कमांडर ने कहा कि ईरान की मिसाइलें 2,000 किलोमीटर की रेंज में अमेरिकी ठिकानों एवं पोतों को निशाना बना सकती है. तस्रीम संवाद समिति ने ब्रिगेडियर जनरल अमीरअली हाजीजदेह के हवाले से कहा, ‘‘न हम, न ही अमेरिकी युद्ध चाहते हैं.’’ कमांडर ने कहा, ‘‘निश्चित तौर पर क्षेत्र में एक-दूसरे का सामना कर रहे कुछ बल ऐसा कुछ कर सकते हैं, जिससे युद्ध शुरू हो सकता है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने एक पूर्ण युद्ध के लिए हमेशा से खुद को तैयार रखा है…हर किसी को पता होना चाहिए कि 2000 किलोमीटर की रेंज में मौजूद सभी अमेरिकी ठिकानों एवं उनके पोतों को हमारी मिसाइलें निशाना बना सकती हैं.’’