मुंबई. निवेशकों ने लिकर कंपनियों के शेयरों को खरीदना शुरू कर दिया है। इसकी वजह यह आम धारणा है कि चुनावों के दौरान अल्कोहल की मांग बढ़ जाती है। हालांकि पहले के आंकड़े और लिकर पनियों के मैनेजमेंट की कमेंटरी से इस तर्क की पुष्टि नहीं होती है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर शेयरों की कीमतों में तेजी है तो भी निवेशकों को इस मौके का इस्तेमाल इन शेयरों को बेचने के लिए करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि इन शेयरों का वैल्यूएशन ज्यादा है। इसके अलावा बढ़ते कर्ज को देखते हुए कई राज्य लिकर पर शुल्क बढ़ाने जा रहे हैं। 2104 में अप्रैल-मई के दौरान हुए लोकसभा चुनावों के दौरान यूनाइटेड ब्रुअरीज, रेडिको खेतान, जीएम ब्रुअरीज, ग्लोबस स्पिरिट्स और तिलकनगर इंडस्ट्रीज के शेयरों 5 से 28 फीसदी की गिरावट आई थी। हालांकि इस दौरान सेंसेक्स 7 फीसदी चढ़ा था। यूनाइटेड स्पिरिट्स और अन्य लिकर कंपनियों ने हाल में कहा था कि चुनावों के दौरान कुछ अनिश्चितताएं दिख सकती हैं। इसकी कई वजहें हैं। चुनावों की अवधि में शराब की बिक्री पर रोक (ड्राई डे) और उत्पाद (Excise) विभाग के अधिकारियों की चुनावी ड्यूटी जैसे कारणों से उत्पादन पर असर पड़ सकता है। यूनाइटेड ब्रुअरीज का कहना है कि बियर कारोबार के लिए चुनाव बड़ी चुनौती हैं क्योंकि इस दौरान मतदान से पहले, गिनती के दौरान और उसके बाद में बिक्री और परिचालन पर रोक लगी रहती है। दुकानों के खुलने के समय को भी घटा दिया जाता है। यूनाइटेड ब्रुअरीज और रेडिको खेतान के अलाला अन्य सभी शराब कंपनियो के शेयर बीते एक साल में 10 से 40 फीसदी तक गिरे हैं। इस गिरावट के बावजूद इनकी वैल्यूएशन काफी महंगी मानी जा रही है। यूनाइटेड ब्रुअरीज के शेयर वित्त वर्ष 20 की अनुमानित कमाई के 50 गुना पर कारोबार कर रहे हैं।
