जीडीपी ग्रोथ रेट ने किया निराश
वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान भारत की वार्षिक जीडीपी ग्रोथ रेट 6.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है. लेकिन इस वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में इसने निराशाजनक प्रदर्शन किया और 5.8 फीसदी पर पहुंच गया. देश में पहले नोटबंदी और फिर जीएसटी ने इकनॉमी का झटका दिया. इससे धीमी हुई ग्रोथ अब तक रफ्तार नहीं पकड़ सकती है. इकनॉमी के लगभग हर सेक्टर में भारत का प्रदर्शन बुरा दिख रहा है. देश में खपत में कमी दर्ज की जा रही है और निवेश घटता जा रहा है. एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑटो सेक्टर की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है. रोजगार के आंकड़े निराशाजनक दिख रहे हैं. मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों की रफ्तार में कमी आई है. यही वजह है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ के रफ्तार अच्छी रहने के प्रति आशंका जताई जा रही है.
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बांग्लादेश और पाकिस्तान से भी पिछड़ने का खतरा
हालात यही रहे तो भारत एनुअल जीडीपी ग्रोथ रेट में अपने पड़ोसियों से पीछे रह सकता है. वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान बांग्लादेश का जीडीपी ग्रोथ रेट 7.9 फीसदी रहा था. वहीं नेपाल का जीडीपी ग्रोथ रेट 7.1 और पाकिस्तान का 5.2 फीसदी रहा था. जबकि वित्त वर्ष 2018-19 की आखिरी तिमाही के दौरान भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट घट कर 5.6 फीसदी रह गया था,. मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तो नतीजे और निराशाजनक रही और जीडीपी ग्रोथ रेट घट कर साढ़े छह साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया.