अवैध खनन के मामलों में विभाग नहीं वसूल पाया २०० करोड़, मात्र २५ करोड़ की गई वसूली
जयपुर. राज्य के कई शहरों में अवैध खनन के मामले आए दिन सुनने को मिल रहे हैं। अनुज्ञापत्र के बिना खनन, पट्टा क्षेत्र के बाहर खनन, बिना अधिशुल्क भुगतान खनिज का उठाव जैसी गतिविधियां अवैध खनन की श्रेणी में आती है। वर्ष 2011-12 से 2016-17 के दौरान खनिजों के अवैध खनन की रिपोर्ट से मालूम चला है कि जयपुर, अलवर, कोटपूतली, नीम का थाना, राजसमंद, सीकर, उदयपुर और ऋषभदेव में पांच वर्षों में करीबन ४००० मामले अवैध खनन, भंडारल और परिवहन के दर्ज हुए और उनमें से विभाग ने करीबन २५ करोड़ ही अब तक वसूल किए और बाकी के करीबन २०० करोड़ का राजस्व अभी भी बकाया है। अगर ये राशि विभाग तय समय पर वसूल कर पाता तो खनन विभाग को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हो सकती थी। माइनिंग विभागों ने पिछले वर्षों में करीबन १०० लाख टन अवैध खनीज का उत्पादन पकड़ा और उनसे करीबन २५ करोड़ ही वसूल कर पाया जबकि इसके लिए सरकार को करीबन २०० करोड़ का राजस्व प्राप्त होता।
