नई दिल्ली. आम चुनावों के लिए कैंपेनिंग शुरू हो चुकी है। पार्टियां सत्ता की रेस में एक दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन राजनैतिक दलों के बीच एक लड़ाई हवा में भी लड़ी जा रही है, वो है अधिक से अधिक हेलिकॉप्टर और चाटर्ड प्लेन बुक कराने के लिए। चुनाव पास हैं और प्रचार जोरों पर दूर-दराज के इलाकों में जो भीड़ नेताओं को देखने आती है उसका एक बड़ा हिस्सा हेलिकॉप्टर देखने भी आता है। नतीजा ये कि चुनाव के साथ हेलिकॉप्टर और चार्टेड प्लेन कंपनियों की चांदी हो गई है। आमतौर पर घंटों के हिसाब से जहाजों और हेलिकॉप्टर की बुकिंग होती है लेकिन इसबार पूरे चुनाव सीजन के लिए बुकिंग पहले से ही फुल है। भारी डिमांड की वजह से आम दिनों के मुकाबले हेलिकॉप्टर का प्रति घंटा किराया दोगुना से तिगुना हो गया है। एक दिन के प्रचार के लिए एक हेलिकॉप्टर पर 15 से 20 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जिनती देर हेलिकॉप्टर खड़ा रहेगा उसका भी किराया भरना होगा। जानकारों की माने तो जितनी आक्रामक तरीके से हेलीकॉप्टर की बुकिंग इस बार हुई है वैसी पहले कभी नहीं हुई। चुंकि हेलीकॉप्टर सीमित हैं इसलिए पहले बुकिंग का मतलब अपनी कैपेंनिग को तेज करना तो है ही साथ ही विपक्षी पार्टी की कैपेनिंग को धीमा करना भी। भारत में लगभग 260 हेलीकॉप्टर और 200 चार्टेड प्लेन हैं। इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने महीनों पहले ही करीब 60 फीसदी हवाई जहाजों की बुकिंग करा ली है। बाकि बचे 40 फीसदी में कांग्रेस और क्षेत्रीय दल बुकिंग करा पाएंगे। इसबार दक्षिण भारत से भी हेलिकॉप्टर की भारी डिमांड आ रही है। इंडस्ट्री को लगता है कि अगर नेताओं में हेलीकॉप्टर का क्रेज यू हीं बढ़ता रहा तो इस जरूरत को पूरा करने के लिए बाहर से हेलिकॉप्टर और छोटे जहाज लीज पर मंगाने होंगे।
