मुंबई. सरकार जल्द गोल्ड बोर्ड बनाने जा रही है। इसका मकसद गोल्ड स्पॉट एक्सचेंजों को रेगुलेट करना है। इस प्रक्रिया से जुड़े दो लोगों ने यह जानकारी दी। ये लोग इंडिया फाउंडेशन एनजीओ की बैठक में शामिल थे। यह एनजीओ नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बनाया है। इस बैठक में एमसीएक्स, एनएसई और बीएसई और इन सभी एक्सचेजों के क्लियरिंग हाउस के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पिछले बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश में गोल्ड स्पॉट एक्सचेंज बनाने की बात कही थी। यह बैठक उसी कवायद का हिस्सा है। गोल्ड पॉलिसी का उद्देश्य सोने को एक एसेट क्लास के रूप में स्थापित करना है। इस कदम से स्पॉट एक्सचेंजों को सोने का मूल्य निर्धारण और गुणवत्ता के मामले में अधिक पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी। भारतीय सोने का बाजार काफी हद तक असंगठित है। ग्राहकों को कई बार सही भाव पर सोना नहीं मिल पाता है। इसके अलावा सोने की शुद्धता को लेकर भी संदेह रहता है। कई बार ग्राहकों से 24 कैरेट सोने का दाम वसूला जाता है लेकिन कम कैरेट के गहने या सोना बेचा जाता है। इस बैठक में शामिल एक व्यक्ति ने बताया कि गोल्ड बोर्ड बनने से ग्राहकों को फायदा होगा क्योंकि इससे सोने का हाजिर कारोबार काफी पारदर्शी हो जाएगा। यह बोर्ड भारत में सोने की गुणवत्ता को लेकर मानक तय करेगा। साथ ही घर में रखे पुराने सोने को रि-साइकिल कर सोने के आयात में कमी लाने की कोशिश करेगा। गौरतलब है कि सोने का इंपोर्ट बढ़ने से देश का चालू खाता घाटा बढ़ता है। भारत में मूल्य के लिहाज से कच्चे तेल के बाद सबसे ज्यादा सोने का आयात किया जाता है। इतना ही नहीं चीन के बाद दुनिया में सोने का सबसे बड़ा खरीदार भारत ही है।
