गायों के नस्ल सुधार और दूध उत्पादन में वृद्धि के लिए सरकार निरंतर प्रयत्नशील: पशुपालन मंत्री
जयपुर। पशुपालन एवं गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने शुक्रवार को आरएलडीबी सभागार में राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत ब्राजील से आयातित उच्च आनुवांशिक गुणवत्ता वाले गिर नस्ल के सांडों के पारम्परिक हिमकृत वीर्य डोजेज का जिलों को वितरण का शुभारंभ किया। उन्होंने जयपुर जिले को सीमन का जार भेंट किया।इस अवसर पर पशुपालन विभाग के निदेशक एवं आरएलडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. आनंद सेजरा भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर पशुपालन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में पशुपालकों के विकास के लिए हर संभव प्रयास में लगी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गायों के नस्ल सुधार पर गंभीरता से काम कर रही है। इसके लिए यथा संभव प्रयास भी किए जा रहे इसी प्रयास का परिणाम है कि आज राज्य के 23 जिलों के लिए ब्राजील से आयातित उच्च आनुवांशिक गुणवत्ता वाले गिर नस्ल के सांडों के पारम्परिक हिमकृत सीमन डोज हमें एनडीडीबी के माध्यम से प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य को ब्राजील के गिर गोवंश के सांडों का हिमकृत सीमन पहली बार प्राप्त हुआ है। अभी इस सीमन का उपयोग राज्य की प्रजनन नीति के अनुसार गिर गोवंश के बाहुल्य वाले क्षेत्रों में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाली शुद्ध गिर गोवंश की मादाओं में कृत्रिम गर्भाधान के लिए किया जाएगा। इस सीमन के उपयोग से कृत्रिम गर्भाधान करने पर राज्य में उच्च आनुवांशिक गुणवत्ता वाले बछड़े और बछड़ियां पैदा होंगे। बछड़ियों में दुग्ध उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी जिससे दूध का उत्पादन अधिक होगा। अभी हमारी गिर गायों के दुध का उत्पादन प्रति दिन 15 से 20 लीटर है जबकि इस सीमन से उत्पादन बढ़कर 50 लीटर तक हो सकता है।
कुमावत ने बताया कि अभी यह आयातित सीमन पशुपालकों को केवल 100 रुपये में उपलब्ध कराया जाएगा। भविष्य में ब्राजील से उच्च गुणवत्ता वाले गिर गोवंश के सीमन को अधिक से अधिक मंगवाए जाने के प्रयास किए जाएंगे जिससे राज्य के पशुपालकों को इसका लाभ मिल सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केवल डेयरी फार्म को ही इसका फायदा नहीं मिलना चाहिए बल्कि पशुपालकों को व्यक्तिगत रूप से भी यह डोज मिले जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो। उन्होंने कहा कि वितरित डोज का रिकार्ड संधारण उचित तरीके से किया जाए जिससे इससे होने वाले लाभ के आधार पर आगे इस सीमन की उपलब्धता राज्य के लिए सुनिश्चित की जा सके।
पशुपालन मंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के अतिरिक्त और संयुक्त निदेशकों के साथ किसानों से भी बातचीत की।
उल्लेखनीय है कि राज्य की प्रजनन नीति के अनुसार इस सीमन का उपयोग राज्य के अजमेर भीलवाड़ा, टोंक, भरतपुर, पाली, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमंद, प्रतापगढ़ जयपुर, सीकर, सहित 23 जिलों में किया जाएगा। इस अवसर पर पशुपालन विभाग और आरएलडीबी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।