नई दिल्ली. सोने की कीमतें भविष्य में चढऩे की संभावना है लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत होगी। सीएलएसए के प्रबंध निदेशक एवं इक्विटी रणनीतिकार क्रिस्टोफर वुड ने निवेशकों को भेजी अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट ग्रीड ऐंड फीयर में कहा है कि निवेशकों को यह विश्वास नहीं करना चाहिए कि सोने की कीमतें तुरंत 1400 डॉलर प्रति औंस के निशान के पार जाएंगी। कैलेंडर वर्ष 2019 में प्रति औंस 1349.80 डॉलर की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोने की कीमतें लगभग 4.6 प्रतिशत कमजोर होकर 1287.55 डॉलर प्रति औंस पर आ गईं। यह वह स्तर है जो दिसंबर 2018 के अंत में दर्ज किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार पिछले साल केंद्रीय बैंक की सोने की खरीदारी 1971 में रिचर्ड निक्सन द्वारा सोने में डॉलर की परिवर्तनीयता समाप्त किए जाने के बाद से अपने सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गई। केंद्रीय बैंक द्वारा सभी खरीदारी जी 7 से बाहर की गई थी। गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों) में प्रवाह भी तेज हुआ है। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी)की रिपोर्टों से पता चलता है कि फरवरी को छोड़कर कुल ईटीएफ प्रवाह जनवरी में शानदार प्रवाह की वजह से भी मजबूत (1.8 अरब डॉलर) बना रहा फरवरी में वैश्विक गोल्ड ईटीएफ और समान योजनाओं में होल्डिंग 33 टन तक घटकर 2479 टन रह गई। यह गिरावट प्रवाह में लगातार चार महीनों की तेजी के बाद दर्ज की गई है। डब्ल्यूजीसी की रिपोर्ट में कहा गया है वैश्विक प्रवाह में निकासी का मुख्य वाहक उत्तर अमेरिकी फंड थे क्योंकि निवेशकों ने इनका इस्तेमाल कर मुनाफा कमाया। हालांकि हमने सस्ती लागत के ईटीएफ में प्रवाह लगातार दर्ज किया जो एक ऐसा कारक है जिस पर हमारा विश्वास रणनीतिक आवंटनों से जुड़ा हुआ है। एशिया में फंडों ने भी निकासी दर्ज की जबकि यूरोपीय और अन्य क्षेत्रों में स्थिति जस की तस बनी रही। हम ब्रिटेन स्थित फंडों में लगातार पूंजी प्रवाह देख रहे हैं। स्वर्ण-समर्थित ईटीएफ और समान योजनाओं की स्वर्ण बाजार में अहम भागीदारी है और संस्थागत तथा व्यक्तिगत निवेशक अपनी कई निवेश रणनीतियों के क्रियान्वयन के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। ईटीएफ में पूंजी प्रवाह अक्सर अल्पावधि और दीर्घावधि रुझान और सोने को बरकरार रखने के प्रति दिलचस्पी को दर्शाता है। विश्लेषक भी वुड के इस नजरिये से सहमत हैं कि सोने की कीमतें 2019 में ऊंचाई की ओर बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि अल्पावधि में सोने का प्रदर्शन काफी हद तक जोखिम की अवधारणा, डॉलर की चाल, और संरचनात्मक आर्थिक सुधारों के प्रभाव पर निर्भर करेगा। उनका मानना है कि ये कारक सोने को लगातार आकर्षक बनाए रखेंगे।
