मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सभी छह सदस्यों ने कटौती के पक्ष के वोट दिया। हालांकि बाहरी सदस्य रवींद्र ढोलकिया 40 आधार अंक की कटौती के पक्ष में थे। केंद्रीय बैंक ने अपने नीतिगत बयान में कहा कि 2019-20 के शेष समय और 2020-21 की पहली तिमाही में मुद्रास्फीति के लक्ष्य से नीचे रहने की उम्मीद है, इसलिए घरेलू मांग बढ़ाकर आर्थिक वृद्घि की चिंताओं को दूर करने के लिए नीतिगत गुंजाइश है। रिजर्व बैंक ने आर्थिक गतिविधियों में आई सुस्ती को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को भी घटाकर 6.1 फीसदी कर दिया। अगस्त में पिछली समीक्षा में इसके 6.9 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। केंद्रीय बैंक ने दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्घि दर के 5.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया है जबकि दूसरी छमाही में यह 6.6 से 7.2 फीसदी रह सकती है।
रुपया 70.89 प्रति डॉलर पर रहा
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई के दूसरी तिमाही में 3.4 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि पहले इसके 3.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। नीतिगत रीपो दर में अपेक्षित कटौती के बाद रुपया आज 70.89 प्रति डॉलर पर अपरिवर्तित रहा जबकि दस साल की अवधि वाले बॉन्ड पर प्रतिफल 8 आधार अंक बढ़कर 6.69 फीसदी पर पहुंच गया। लेकिन आर्थिक वृद्वि के अनुमान में कमी के कारण सेंसेक्स 433.56 अंक यानी 1.14 फीसदी की गिरावट के साथ 37,673.31 पर बंद हुआ। चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्घि दर के अनुमान में 80 आधार अंक की कटौती की गई है लेकिन इस समय रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती पर्याप्त है। इससे पहले केंद्रीय बैंक अगस्त तक सात महीने में इसमें कुल 110 आधार अंक की कटौती कर चुका था।